Activity No 29

🏳‍🌈प्रभु🙏पतित पावन (दर्शन स्तुति) का अर्थ सहित🏳‍🌈

🌈
प्रभु पतित पावन में अपावन , चरण आयो शरण जी ।
यों विरद आप निहार स्वामी,मेट जामन मरण जी ॥1||
🏳‍🌈
👉अर्थ- हे प्रभु आप अपवित्र को पवित्र करने वाले हो,
मै आपकि चरण-शरण मे आया हु
आप अपनी किर्ती को निहारकर मेरी विनती को सुनकर व अपने दयालु स्वभाव को देखकर मेरे जन्म मरण को
नष्ट करो
🌈
तुम ना पिछान्या अन्य मान्या , देव विविध प्रकार जी ।
या बुध्दि सेती निज न जाण्यो , भ्रम गिन्यो हितकार जी ॥2||
🏳‍🌈
👉अर्थ;- हे भगवान मैने आज तक आपको पहचाना नही
अन्य रागी-व्देषी देवी देवताओ कि पुजा करता रहा
(मिथ्या देव देवता कि पुजा करना पाप है और संसार मे भ्रमण करने का यह भी एक कारण है)
🌈
भव विकंट वन मेँ कर्म बैरी,ज्ञान धन मेरो हरयो ।
तव इष्ट भुल्यो भ्रष्ट होय,
अनिष्ट गती धरतो फिरयो ॥3||
🏳‍🌈
👉अर्थ;- इस संसार रुपी जंगल (वन)में कर्म रुपी शत्रु ने मेरा ज्ञान रुपी धन चुरा लिया है
इस कारण मै इष्ट को भुलकर भ्रष्ट हुवा (सही मार्ग से हट गया ) चारो गती(मनुष्य तिर्यच नरक स्वर्ग) मे भ्रमण करता रहा
🌈
घन घडी यों धन दिवस यों ही , धन जन्म मेरो भयो ।
अब भाग मेरो उदय आयो ,दरश प्रभुजी को लख लियो ॥4||
🏳‍🌈
👉अर्थ ;-धन्य है आज का यह समय , धन्य है आज का यह दिन ,
आज मेरा जन्म धन्य हो गया , सफल हो गया ।
आज मेरे भाग्य का उदय हुआ जो मुझे आपका दर्शन मिला
🌈
छवि वितरागी नग्न मुद्रा , द्रुष्टि नासा पे धरैं ।
वसु प्रातिहार्य अनंत गुण जुत , कोटि रवि छवि को हरैं ॥5||
🏳‍🌈
👉अर्थ;- हे प्रभु आपकि छवि वितरागी है , आपकि मुद्रा नग्न है , आपकी नजर नासाग्रा है
आप आठ प्रातिहार्य और अनंत गुणों से युक्त है जो कि करोडों सुर्यो से भी तेजस्वी है
🌈
मिट गयो तिमिर मिथ्यात्व मेरो , उदय रवि आत्म भयो ।
मो उर हर्ष ऐसो भयो , मणु रंक चिंतामणि लयो ॥6||
🏳‍🌈
👉अर्थ:- हे भगवान आपके दर्शन से मेरा मिथ्यात्व रुपी अंधकार नष्ट हुवा और सम्यक्त्व रुपी सुर्य का आत्मा मे उदय हुवा
आपके दर्शन को पाकर मेरे ह्रदय मे इतना हर्ष हुवा कि मानो किसी निर्धन को चिंतामणी रत्न कि प्राप्ती हुई हो
🌈
मै हाथ जोड नवाऊ मस्तक,
विनऊ तव चरण जी ।
सर्वोत्क्रुष्ट त्रिलोकपती जिन, सुनहु तारन तरन जी॥7||
🏳‍🌈
👉अर्थ – हे प्रभु मै दोनो हाथों को जोडकर मस्तक झुकाकर विनय से आपके चरणों मे नमस्कार करता हुँ
हे भगवान आप सब से उत्तम वितरागी हो
तीन लोक के नाथ हो , तारने वाले तारणहार हो मेरी विनंती सुनो
🌈
जाचुँ नही सुरवास पुनिं,नर राज परिजन साथ जी ।
बुध जाचहुँ तव भक्ति , भव भव दिजिए शिवनाथ जी ॥8||
🏳‍🌈
👉अर्थ-हे भगवान मै आपके दर्शन का फल स्वर्ग सुख ,मनुष्य मे माता पिता परिवार धन कुछ भी नही चाहता
बुधजन कहते है कि मै तो भव भव मे आपकी भक्ती चाहता हु

🌈🌈🌈🏳‍🌈🌈🌈🌈

Activity No 28

Question : Pathshala ke letters mai har letter ka kya dharmik word ban sakta hai?

Answer :

P-. Prashast
A. Aagam
T. Tatva
H. Harshit
S. Shashwat
H. Hitoupdeshi
A. Adhyatam
L. Lok
A. Aatma

 

Activity No. 28

G.S.T. के अध्यात्मिक अर्थ

1) G. = गोम्मटसार
S. = समयसार
T. = त्रिलोकसार

2) G. = गंधहस्ति महाभाष्य
S. = सर्वार्थसिद्धि
T. = तत्त्वार्थसूत्र

3) G. = गुरु
S. = शास्त्र
T. = तीर्थंकर (देव)

4) G. = गिरनार
S. = सिद्धक्षेत्र से
T. = [नेमिनाथ] तीर्थंकर मोक्ष गये।

5) G. = गारव रहित
S. = समता धारक
T. = तपस्वी होते है।

6) G. = गणधर रचित
S. = सिद्धांत ही
T. = तत्व है।

7) G. = गुणस्थान की
S. = श्रेणीयाँ चढ़ते हुए
T. = तीर्थंकर/केवली होते है।

8) G. = गुरु
S. = संसार से
T. = तारते है।

9) G. = गुरु उपदेश से
S. = सप्त कुव्यसन का
T. = त्याग होता है।

10) G. = ज्ञानी का
S. = सम्यग्दर्शन से
T. = तत्वार्थ श्रद्धान होता है।

11) G. = ज्ञानवान
S. = श्रद्धावान
T. = त्यागी

12) G. = गुण
S. = सहभावी होते है यह
T. = तत्वज्ञान हुआ।

13) G. = गुरु गौतम गणधर को
S. = समवशरण में संसार से
T. = तारणेवाले तीर्थंकर मिल गये।

14) G= ज्ञान
S= संयम
T= तप सहित मुनिराज होते हैं।

15) ????

आप स्वयं चिंतन करें

Activity No 27

जहाँ खिरती है भगवान की वाणी
जिसे सुन भव्य हो जाते है सभी प्राणी

करते हैं आज समवसरण की सैर
जहाँ सब भूल जाते हैं आपसी वैर

🍁Topic – समवसरण 🍁
🌸 1⃣ समवसरण की रचना कौन करते हैं ❓
🌼 🅰 कुबेरदेव

🌸2⃣ समवसरण में भगवान मूल स्वरूप मे किस दिशा में बिराजमान होते है ❓
🌼 🅰पूर्व दिशा

🌸 3⃣ समवसरण का वर्णन किस सूत्र में आता है ❓
🌼 🅰 उववाई सूत्र

🌸 4⃣ सर्वोत्कृष्ट पुण्य से मिले आश्चर्य कहाँ देखने को मिलते है ❓
🌼 🅰 समवसरण में

🌸 5⃣ समवसरण में उत्तर दिशा में कौनसा ध्वज होता है ❓
🌼 🅰 सिंह ध्वज

🌸 6⃣ समवसरण की रचना किसकी आज्ञा से होती है ❓
🌼 🅰 सौधर्म इन्द्र की आज्ञा से

🌸 7⃣ समवसरण में सुगंधित जल की वृष्टी कौन करता है ❓
🌼 🅰 मेघकुमार देव

🌸 8⃣ समवसरण में भगवान किस आसन में बैठते है ❓
🌼 🅰 पद्मासन

🌸 9⃣ समवसरण में पश्चिम दिशा में कौनसा ध्वज होता है ❓
🌼 🅰 गज ध्वज

🌸 🔟 इस अवसर्पिणी काल में कितनी बार समवसरण की रचना हुई ❓
🅰 🌼 64 बार

🌸1⃣1⃣ किस भगवान के 12 समवसरण हुए ❓
🌼 🅰 आदिनाथजी

🌸 1⃣2⃣ समवसरण का आकार कैसा ❓
🌼 🅰 गोल या चतुष्कोण

🌸 1⃣3⃣ समवसरण में देवच्छंद कहाँ होता है ❓
🌼 🅰 दूसरे गढ में ईशान कोण में

🌸 1⃣4⃣ समवसरण की प्रत्येक दिशा में कितने द्वार होते है ❓
🌼 🅰 3 द्वार

🌸 1⃣5⃣ समवसरण की कुल सिढियाँ कितनी ❓ 🌼 🅰 80000

🌸 1⃣6⃣ समवसरण में प्रथम गढ कौन बनाता है ❓🌼 🅰 भवनपति देव

🌸 1⃣7⃣ किसके प्रभाव से समवसरण में स्थान का अभाव नही होता ❓
🌼 🅰 तीर्थंकर के प्रभाव से

🌸 1⃣8⃣ समवसरण की चारो दिशा में कितने योजन प्रमाण ध्वज होते है ❓
🌼 🅰 1 योजन

🌸 1⃣9⃣ कितने देवी देवता हमेशा भगवान की सेवा में हाजिर रहते है ❓
🌼 🅰 1 करोड

🌸 2⃣0⃣ महावीर स्वामी के समय देवो ने कितनी बार समवसरण की रचना की ❓
🌼 🅰 8 बार

🌸 2⃣1⃣ समवसरण भूमि को काँटा – कंकर रहित कौनसे देव करते है ❓
🌼 🅰 वायुकुमार देव

🌸 2⃣2⃣ समवसरण में अग्नि कोण में गणधर के पीछे कौन बैठते हैं ❓
🌼 🅰 14 पूर्वी , अवधिज्ञानी , मन:पर्यवज्ञानी

🌸 2⃣3⃣ समवसरण में कितने भवो के बारे मे देखा व जाना जा सकता है ❓
🌼 🅰 3 भव ( भूत , भविष्य, वर्तमान)

🌸 2⃣4⃣ घूटनो तक अचित पुष्पों की वृष्टी कौन करता है ❓
🌼 🅰 अधिष्टायक देवी

🌸 2⃣5⃣ समवसरण में सिंहासन की रचना कौन करते हैं ❓
🌼 🅰 व्यंतर देव

🌸 2⃣6⃣ समवसरण पृथ्वी से कितने धनुष ऊँचा होता है ❓
🌼 🅰 5000 धनुष

🌸 2⃣7⃣ समवसरण में कितने वाद्य बजते है ❓
🌼 🅰 साढ़े 12 करोड़

🌸 2⃣8⃣ समवसरण हमेशा कहाँ रहता है ❓
🌼 🅰 महाविदेह क्षेत्र

🌸 2⃣9⃣ समवसरण में भगवान किस राग में देशना देते हैं ❓
🌼 🅰 मालकोश राग में

🌸 3⃣0⃣ वैर का विश्राम स्थान कौन सा ❓
समवसरण

Activity No. 26

दिमाग लगाओ 🙇‍♀ तीर्थस्थान के नाम बताओ
🔓1)🌙🌕
🔑1)

🔓2) ✋⛰
🔑2)

🔓3) 💎🌕
🔑3)

🔓5) 🐘❌पुर
🔑5)

🔓6) 👣⛰
🔑6)

🔓7) 🍞🌕
🔑7)

🔓8) 👂🔔⭕
🔑8)

🔓9) 8⃣👣
🔑9)

🔓10) 🍞⛰
🔑10)

🔓13) 🌺😬⛰
🔑13)

🔓14) 👀⛰
🔑14)

🔓15) 🍌sh⛰
🔑15)

🔓16)Taa🎨
🔑16)

🔓17) o 🌊 यां
🔑17)

🔓18) 🐚🙏
🔑18)

🔓19) 👑🏠
🔑19)

🔓20) 🐍🙏
🔑20)

🔓22) 💪सा❌
🔑22)

🔓24) 🎼⛰
🔑24)

🔓25) श्री👣⛰
🔑
Activity 26
उत्तर

1) चंद्रपुरी

2) हस्तगीरी

3) रत्नपुरी

5) हस्तिनापुर

6) कदम गिरी

7) पावापुरी

8) श्रवणबेलगोला

9) अष्टा पद

10) पावा गिरी

13) पुष्पदंतगिरी

14) नैनागिरी

15) कैलाशगिरी

16) तारंगा

17) ओसियां

18) शंखेश्वर

19) राजगृही

20) नागेश्वर

22)बलसाणा

24) सुरगिरी

25) श्रीपदगिरी

Activity No. 25

आज की एक्टिविटी का नाम है – परीक्षा सूत्रों से
आज की एक्टिविटी में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर अंताक्षरी की तरह प्रथम उत्तर के अंतिम अक्षर से शुरू करते हुए देना है ।सभी प्रश्न तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ से पूछे गए है अतः प्रश्न के उत्तर में मात्र सूत्र लिखना है । प्रथम प्रश्न का उत्तर म अक्षर से शुरू होगा । जैसे –
प्रश्न – सम्यक दर्शन का लक्षण क्या है ?
उत्तर – तत्वार्थश्रद्धानम् सम्यग्दर्शनम् ।।1-2।।
आपके लिए प्रश्न हैं –
1. मूल में बंध के कारण कितने एवं कौन कौन से हैं ?
2. शुक्ल ध्यान के प्रथम दो भेदों की विशेषता को बताने वाले वीचार का लक्षण क्या है ?
3. मनुष्य लोक में दिन रात आदि का व्यवहार जिनके द्वारा होता है ।
4. जीव के पांच भावों में से एक भाव के भेद प्रभेद बताने वाला सूत्र ।
5. चौदह नदियां कौन सी किस दिशा में बहती है ?
6. वैमानिक देवों में उत्तरोत्तर क्या क्या हीनता है ?
7. व्रतधारी जीव की क्या विशेषता है ?
8. वह शरीर जो लब्धि निमित्ताक होता है ?
9. कषाय अथवा प्रमादवश किसी जीव के प्राण हरना क्या कहलाता है ?
10. निश्चय सम्यग्दर्शनादि को जानने के उपाय कौन कौन से हैं ?
11. चरित्र मोह के उदय से होने वाले परिषह कौन कौन से हैं ?
12. वह कौन सा द्रव्य है जो चेतन भी नहीं है और अरुपी भी नहीं है ?
13. लब्धि एयर उपयोग को क्या कहते हैं ?
14. ज्योतिषी देव कहाँ रहते हैं और किसकी प्रदक्षिणा देते हैं ?
15. जिनकी विराधना से 70 कोड़ा कोड़ी सागर की स्थिति वाले दर्शनमोहनीय कर्म का आस्रव हो ?
16. मन वचन काय की कुटिलता से किस कर्म का आस्रव होता है ?
17. 9-4-10-5-2 किसके भेद हैं ?
18. पद्म सरोवर में कमल कितने विस्तार का है ?
19. ममत्व परिणाम को आचार्य ने क्या कहा है ?
20. वह ध्यान जो पहले से पांचवें गुणस्थान तक होता है ?
21. सामायिक जे प्रति अनादर और सामायिक पाठ भूल जाना किस व्रत का अतिचार है ?
22. अजीव के आधार से होने वाला आस्रव कितने प्रकार का है ?
23. किसी की गुप्त बात प्रकट करना किआ व्रत का अतिचार है ?
24. उपपाद जन्म किन किन को होता है ?
25. जिनका तीनों लोकों में निवास है वे कितने प्रकार के होते हैं ?

Activity 25
आज की एक्टिविटी का नाम है – परीक्षा सूत्रों से
उत्तर
जैसे –
प्रश्न – सम्यक दर्शन का लक्षण क्या है ?
उत्तर – तत्वार्थश्रद्धानम् सम्यग्दर्शनम् ।।1-2।।
आपके लिए प्रश्न हैं –
1. मूल में बंध के कारण कितने एवं कौन कौन से हैं ?
मिथ्यादर्शनाविरति – प्रमाद कषाय योगबंधहेतवः ।।
2. शुक्ल ध्यान के प्रथम दो भेदों की विशेषता को बताने वाले वीचार का लक्षण क्या है ?
विचारोsर्थ – व्यंजनयोग – संक्रान्तिः ।।
3. मनुष्य लोक में दिन रात आदि का व्यवहार जिनके द्वारा होता है ।
तत्क्रतः काल विभागः ।।
4. जीव के पांच भावों में से एक भाव के भेद प्रभेद बताने वाला सूत्र ।
गति कषाय लिंग मिथ्यादर्शनाज्ञानासंयता सिद्ध लेश्याश्चतुश्चतु ।।
5. चौदह नदियां कौन सी किस दिशा में बहती है ?
द्वयोर्द्वयोः पूर्वाः पूर्वगाः ।।
6. वैमानिक देवों में उत्तरोत्तर क्या क्या हीनता है ?
गति शरीर परिग्रहाभिमानतो हीनाः ।।
7. व्रतधारी जीव की क्या विशेषता है ?
निः शल्यो व्रती ।।
8. वह शरीर जो लब्धि निमित्तक होता है ?
तैजसमपि ।।
9. कषाय अथवा प्रमादवश किसी जीव के प्राण हरना क्या कहलाता है ?
प्रमत्तयोगात् प्राणव्यपरोपणं हिंसा ।।
10. निश्चय सम्यग्दर्शनादि को जानने के उपाय कौन कौन से हैं ?
सत्संख्याक्षेत्र स्पर्शनकालान्तर भावाल्पबहुत्वैश्च ।।
11. चरित्र मोह के उदय से होने वाले परिषह कौन कौन से हैं ?
चारित्रमोहेनाम्न्यारती स्त्री निषद्याक्रोश याचना सत्कार पुरुष्कारः ।।
12. वह कौन सा द्रव्य है जो चेतन भी नहीं है और अरुपी भी नहीं है ?
रूपिणः पुद्गलाः ।।
13. लब्धि एयर उपयोग को क्या कहते हैं ?
लब्ध्युपयोगौ भावेन्द्रियम् ।।
14. ज्योतिषी देव कहाँ रहते हैं और किसकी प्रदक्षिणा देते हैं ?
मेरु प्रदिक्षणानित्यगतयो नृलोके ।।
15. जिनकी विराधना से 70 कोड़ा कोड़ी सागर की स्थिति वाले दर्शनमोहनीय कर्म का आस्रव हो ?
केवलिश्रुतसंघधर्मदेवावर्णवादो दर्शनमोहस्य ।।
16. मन वचन काय की कुटिलता से किस कर्म का आस्रव होता है ?
योगवक्रता विसंवादनंचाशुभस्य नाम्नः ।।
17 9-4-10-5-2 किसके भेद हैं ?
नावचतुर्दश पंचद्विभेदा यथाक्रमम् प्रागध्यानात् ।।
18. पद्म सरोवर में कमल कितने विस्तार का है ?
तन्मधयेयोजनम् पुष्करं ।।
19. ममत्व परिणाम को आचार्य ने क्या कहा है ?
मुर्छा परिग्रहः ।।
20. वह ध्यान जो पहले से पांचवें गुणस्थान तक होता है ?
हिंसानृतस्तेय विषयसंरक्षणेभ्यो रौद्रमविरतदेश विरतयो ।।
21. सामायिक जे प्रति अनादर और सामायिक पाठ भूल जाना किस व्रत का अतिचार है ?
योगदःप्राणिधानानादर स्मृत्यनुपस्थानानि ।।
22. अजीव के आधार से होने वाला आस्रव कितने प्रकार का है ?
निवर्तनानिक्षेपसंयोगनिसर्गाद्वि चतुर्द्वित्रिभेदाः परम ।।
23. किसी की गुप्त बात प्रकट करना किआ व्रत का अतिचार है ?
मिथ्योपदेश रहोभ्याख्यान कूटलेखक्रियान्यासापहार साकारमंत्र भेदा ।।
24. उपपाद जन्म किन किन को होता है ?
देवनारकाणामुपपादः ।।
25. जिनका तीनों लोकों में निवास है वे कितने प्रकार के होते हैं ?
देवश्चतुर्निकायाः ।।

Activity No. 24

आज की एक्टिविटी का नाम है – सुमिरें आचार्यों को
आज की एक्टिविटी में आप सभी को सभी प्रश्नों के उत्तर आ से ही देने हैं ।
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं –
1. सप्त भयों में से एक ।
2.अभिलाषा का एक पर्यायवाची नाम ।
3. अवगाहन हेतुत्व है लक्षण जिसका ।
4. शिकार खेलना कहलाता है ।
5. आचार्यों की परम्परा से प्राप्त मूल सिद्धांत कहलाता है ।
6. दक्षिण पूर्व विदिशा का नाम ।
7. सम्यक दर्शन के अनेक भेदों में से एक।
8. धर्म ध्यान का एक भेद ।
9. जीव का एक पर्यायवाची नाम ।
10. आचार्य जिन सेन स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ ।
11. स्वाध्याय का एक भेद।
12. मायाचार परिणाम के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का एक धर्म ।
13. काल का एक प्रमाण (नाप) विशेष।
14. शास्त्रो मे काथ के खोड़े के समान जिस कर्म को बताया है।
15.आचार्य समंथ भद्र स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ।
16. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वरूप क बिना अन्य पदार्थ एवं प्रभाव किंचित मात्र भी आत्मा क नही है- ऐसा बताने वाला प्रत्येक आत्मा का एक धर्म।
17. निकट भव्य कहलाता है।
18.जिस माह मे स्वर्ग के असंख्यात देव नंदीश्वर द्वीप मे पूजन करने जाते है।
19. जब तक कर्म उदय मे ना आवे तब तक काल कहलाता है।
20. चार संघ का एक भेद।
Activity 24
आज की एक्टिविटी का नाम है – सुमिरें आचार्यों को
उत्तर
1. सप्त भयों में से एक ।
आकस्मिक
2.अभिलाषा का एक पर्यायवाची नाम ।
आकांक्षा
3. अवगाहन हेतुत्व है लक्षण जिसका ।
आकाश
4. शिकार खेलना कहलाता है ।
आखेट
5. आचार्यों की परम्परा से प्राप्त मूल सिद्धांत कहलाता है ।
आगम
6. दक्षिण पूर्व विदिशा का नाम ।
आग्नेय
7. सम्यक दर्शन के अनेक भेदों में से एक।
आज्ञा
8. धर्म ध्यान का एक भेद ।
आज्ञा विचय
9. जीव का एक पर्यायवाची नाम ।
आत्मा
10. आचार्य जिन सेन स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ ।
आदिपुराण
11. स्वाध्याय का एक भेद।
आम्नाय
12. मायाचार परिणाम के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का एक धर्म ।
आर्जव धर्म
13. काल का एक प्रमाण (नाप) विशेष।
आवली
14. शास्त्रो मे काथ के खोड़े के समान जिस कर्म को बताया है।
आयुकर्म
15.आचार्य समंथ भद्र स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ।
आप्तमीमांसा
16. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वरूप क बिना अन्य पदार्थ एवं प्रभाव किंचित मात्र भी आत्मा क नही है- ऐसा बताने वाला प्रत्येक आत्मा का एक धर्म।
आकिंचन्य धर्म
17. निकट भव्य कहलाता है।
आसन्न भव्य
18.जिस माह मे स्वर्ग के असंख्यात देव नंदीश्वर द्वीप मे पूजन करने जाते है।
आषाढ
19. जब तक कर्म उदय मे ना आवे तब तक काल कहलाता है।
आबाधा काल
20. चार संघ का एक भेद।
आर्यिका

Activity No. 23

आज की एक्टिविटी का नाम है – करें प्रथमानुयोग की सैर
इस एक्टिविटी में आपको कुछ वाक्य दिये जायेंगे और आपको बताना है कि वह किसने किससे और कब कहा ।
तो
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं –
1. क्या इस पृथ्वी पर मेरे जैसे और भी असंख्य चक्रवर्ती राजा हो गए हैं ? इस पर्वत का खंड खंड उनकी प्रशस्तियों से भरा हुआ है । इसमें तो एक नाम लिखने की भी जगह नहीं है ।
2. भाई ! तू इस मंत्र को रात ले और जीवन में उतार ले , तेरा कल्याण हो जाएगा । मंत्र है – मा तुष मा रुष (राग मत कर द्वेष मत कर)
3. मेरे मरने के पश्चात संसार को शिक्षा देने के लिये मेरे खाली हाथ अर्थी से बाहर रखे जाएं और मेरे जनाजे के साथ अनेक देशों से लूटी हुई विशाल संपत्ति श्मशान भूमि तक ले जाई जाए , जिससे जनता यह अनुभव कर सकें कि आत्मा के साथ कोई सांसारिक पदार्थ नहीं जाता ।
4. इस समय सवाल मेरे या आपके जीवन का नहीं , अपितु जैन शासन की रक्षा का है । अब विलंब करोगे तो हम दोनों पकड़े जायेंगें , इसलिए जल्दी जाओ । जैन शासन की प्रभावना जितनी आप कर सकेंगें , उतनी मैं नहीं कर सकता , इसलिए जैन शासन की सेवा के लिये आप अपना जीवन बचाओ ।
5. मेरे पवित्र कुल को उज्ज्वल करने वाली कन्या , मैं मानता हूं कि मजाक में दिया गया व्रत भी सत्य है परंतु वह तो मात्र आठ दिनों के लिये ही था जबकि तू तो विवाह से ही इनकार कर रही हो।
6. फेरे नहीं हुए उससे क्या ? मैं उनको हृदय से वरण कर चुकी हूँ , वे ही मेरे स्वामी और जीवन साथी है मेरे हृदय में किसी और के लिये स्थान नहीं है ।अब सांसारिक भोगों के बदले मोक्ष की साधना में मैं उनकी संगिनी बनूँगी और अपने नाथ के धर्म पथ पर चल कर अपना आत्म कल्याण करूँगी ।
7. लोक निंदा के भय से आपने मुझे तो त्याग दिया परंतु लोक निंदा के भय से आप कभी जैनधर्म को मत त्यागना ।

Activity 23
करें प्रथमानुयोग की सैर
उत्तर
1. क्या इस पृथ्वी पर मेरे जैसे और भी असंख्य चक्रवर्ती राजा हो गए हैं ? इस पर्वत का खंड खंड उनकी प्रशस्तियों से भरा हुआ है । इसमें तो एक नाम लिखने की भी जगह नहीं है ।

भरत चक्रवती ने अपने सेनापति से कहा जब वे वृषभाचल पर्वत पर अपना नाम लिखने गए थे ।

2. भाई ! तू इस मंत्र को रात ले और जीवन में उतार ले , तेरा कल्याण हो जाएगा । मंत्र है – मा तुष मा रुष (राग मत कर द्वेष मत कर)

शिवभूति मुनिराज के गुरु ने शिवभूति मुनिराज से कहा जब उन्हें एक शब्द भी स्मरण नही रहता था।

3. मेरे मरने के पश्चात संसार को शिक्षा देने के लिये मेरे खाली हाथ अर्थी से बाहर रखे जाएं और मेरे जनाजे के साथ अनेक देशों से लूटी हुई विशाल संपत्ति श्मशान भूमि तक ले जाई जाए , जिससे जनता यह अनुभव कर सकें कि आत्मा के साथ कोई सांसारिक पदार्थ नहीं जाता ।

सिकन्दर ने अपने साथियों से अपनी मृत्यु से पहले अंतिम समय मे कहा ।

4. इस समय सवाल मेरे या आपके जीवन का नहीं , अपितु जैन शासन की रक्षा का है । अब विलंब करोगे तो हम दोनों पकड़े जायेंगें , इसलिए जल्दी जाओ । जैन शासन की प्रभावना जितनी आप कर सकेंगें , उतनी मैं नहीं कर सकता , इसलिए जैन शासन की सेवा के लिये आप अपना जीवन बचाओ ।

निकलंक ने अकलंक से कहा जब सैनिक उनके पीछे पड़े थे ।

5. मेरे पवित्र कुल को उज्ज्वल करने वाली कन्या , मैं मानता हूं कि मजाक में दिया गया व्रत भी सत्य है परंतु वह तो मात्र आठ दिनों के लिये ही था जबकि तू तो विवाह से ही इनकार कर रही हो।

प्रियदत्त सेठ ने अपनी पुत्री अनन्तमती से कहा जब उन्होंने विवाह के लिये मना कर दिया था ।

6. फेरे नहीं हुए उससे क्या ? मैं उनको हृदय से वरण कर चुकी हूँ , वे ही मेरे स्वामी और जीवन साथी है मेरे हृदय में किसी और के लिये स्थान नहीं है ।अब सांसारिक भोगों के बदले मोक्ष की साधना में मैं उनकी संगिनी बनूँगी और अपने नाथ के धर्म पथ पर चल कर अपना आत्म कल्याण करूँगी ।

राजुल ने अपने पिता से कहा जब नेमिकुमार ने दीक्षा ले ली ।

7. लोक निंदा के भय से आपने मुझे तो त्याग दिया परंतु लोक निंदा के भय से आप कभी जैनधर्म को मत त्यागना ।

सीता जी ने कृतांतवक्र सेनापति से कहा जब उन्हें जंगल मे छोड़ा गया ।

Activity No. 22

इस एक्टिविटी में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर तत्वार्थ सूत्र के प्रथम एवं द्वितीय अध्याय से देने हैं ।
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं …..
1. सिद्ध भगवान जे पांच में से कितने भाव हैं ?
2. शीघ्रता से पदार्थों का ज्ञान होना कहलाता है ?
3. घर के नौकर को उसके करोड़ीमल नाम से बुलाना कौन सा निक्षेप है ?
4. जीव के यथार्थ स्वभाव को बताने वाला सूत्र लिखें ?
5. चींटी कितने इन्द्रिय जीव है ?
6. वह ज्ञान जो नारकियों को तो होता है किंतु मनुष्यों और तिर्यन्चों को नहीं होता ?
7. एक से चार इन्द्रिय तक के जीवों के कितने शरीर होते हैं ?
8. असिद्धत्व किस भाव का भेद है ?
9. अ नामक जीव के पास पांच में से एक ज्ञान है और ब के पास दो । बताइये कौन महिमावन्त है ?
10. कभी न भूलने की शक्ति क्या कहलाती है ?
11. भूत पिशाच राक्षस आदि का कौन सा जन्म होता है ?
12. जानना देखना स्वभाव का एक नाम ?
13. विद्वान को प्रवचन करते समय ही विद्वान कहना किस नय का कथन है ?
14. यह जीव पांच भावों में से किस भाव को भूलकर अनादि से दुखी है ?
15. जो चक्षु और मन के अतिरिक्त शेष चार इन्द्रियों के द्वारा होता है ?
16. भगवान की पूजन करने का भाव पांच भावों में से एक ?
17. स्थावर कितने इन्द्रिय जीव है ?
18. ऐसे कितने शरीर हैं जो समस्त संसारी जीवों के पाए जाते हैं ?
19. एक साथ दो ज्ञान होंगें तो कौन कौन से ?
20. जीव रागी द्वेषी होने पर भी अनादि से शुद्ध चैतन्यमय है – ऐसा गौरव दिलाने वाला भाव ?
21. मक्खी मच्छर आदि का होने वाला जन्म ?
22. तालाब में पानी के बाहर निकली सूंड को देखकर डूबे हुए हाथी का ज्ञान कहलाता है ?
23. जीव , अधिकतम कितने समय में नया शरीर धारण कर लेता है ?
24. एक जीव के एक साथ कितने शरीर हो सकते हैं ?
25. आदिनाथ के समवसरण में भरत जी को देखकर कहना – ये तो वही हैं जिन्हें युद्ध के क्षेत्र में देखा था – यह कौन सा मति ज्ञान है ?
Activity 22
उत्तर
1. सिद्ध भगवान जे पांच में से कितने भाव हैं ?
दो
2. शीघ्रता से पदार्थों का ज्ञान होना कहलाता है ?
क्षिप्र
3. घर के नौकर को उसके करोड़ीमल नाम से बुलाना कौन सा निक्षेप है ?
नाम
4. जीव के यथार्थ स्वभाव को बताने वाला सूत्र लिखें ?
उपयोगोलक्षणं
5. चींटी कितने इन्द्रिय जीव है ?
तीन
6. वह ज्ञान जो नारकियों को तो होता है किंतु मनुष्यों और तिर्यन्चों को नहीं होता ?
भवप्रत्यय अवधिज्ञान
7. एक से चार इन्द्रिय तक के जीवों के कितने शरीर होते हैं ?
तीन
8. असिद्धत्व किस भाव का भेद है ?
औदायिक
9. अ नामक जीव के पास पांच में से एक ज्ञान है और ब के पास दो । बताइये कौन महिमावन्त है ?

10. कभी न भूलने की शक्ति क्या कहलाती है ?
धारणा
11. भूत पिशाच राक्षस आदि का कौन सा जन्म होता है ?
उपपाद
12. जानना देखना स्वभाव का एक नाम ?
उपयोग
13. विद्वान को प्रवचन करते समय ही विद्वान कहना किस नय का कथन है ?
ऐवंभूत
14. यह जीव पांच भावों में से किस भाव को भूलकर अनादि से दुखी है ?
पारिणामिक
15. जो चक्षु और मन के अतिरिक्त शेष चार इन्द्रियों के द्वारा होता है ?
व्यंजनावग्रह
16. भगवान की पूजन करने का भाव पांच भावों में से एक ?
औदायिक
17. स्थावर कितने इन्द्रिय जीव है ?
एक
18. ऐसे कितने शरीर हैं जो समस्त संसारी जीवों के पाए जाते हैं ?
दो
19. एक साथ दो ज्ञान होंगें तो कौन कौन से ?
मति श्रुत
20. जीव रागी द्वेषी होने पर भी अनादि से शुद्ध चैतन्यमय है – ऐसा गौरव दिलाने वाला भाव ?
पारिणामिक
21. मक्खी मच्छर आदि का होने वाला जन्म ?
सम्मूर्छन
22. तालाब में पानी के बाहर निकली सूंड को देखकर डूबे हुए हाथी का ज्ञान कहलाता है ?
अनिसृत
23. जीव , अधिकतम कितने समय में नया शरीर धारण कर लेता है ?
चार
24. एक जीव के एक साथ कितने शरीर हो सकते हैं ?
चार
25. आदिनाथ के समवसरण में भरत जी को देखकर कहना – ये तो वही हैं जिन्हें युद्ध के क्षेत्र में देखा था – यह कौन सा मति ज्ञान है ?
प्रत्यभिज्ञान/संज्ञा

Activity No. 21

आज की एक्टिविटी का नाम है – सम्यक निर्णय
इस एक्टिविटी में आपको ज्यादा कुछ नही करना बस प्रत्येक प्रश्न का उत्तर हाँ या ना में देना है …..
तो आइए शुरू करते हैं ।
1. जिनके चार कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं ।
2. सभी संमूर्छन जीव असंगी होते हैं ।
3. नित्य निगोद वह स्थान है जहां से जीव कभी निकलता नही है ।
4. इतर निगोद वह स्थान है जहाँ से जीव निकलता भी है और जाता भी है ।
5. विश्व में जाति अपेक्षा छह और संख्या अपेक्षा अनंत द्रव्य नहीं हैं ।
6. सभी फूल आकाश में ही खिलते हैं ।
7. मुनिराजों के निमित्त से उनके लिए बनाया भोजन निर्दोष है।
8 . भरत ऐरावत क्षेत्रों में लगातार 6 काल कर्मभूमि और 6 काल भोगभूमि रहती है।
9. प्रमत्तदशा का मात्र छठा गुणस्थान होता है।
10. पाकिस्तान से भी अनंत जीव मोक्ष गए हैं ।
11. जिनके तीन कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं।
12. छह ढाला ग्रंथ के रचयिता कविवर बुधजन जी हैं ।
13. नंदीश्वर द्वीप में 52 पर्वत नहीं हैं ।
14. नित्य निगोदिया जीव को अभी प्रथम गुणस्थान भी नहीं है।
15. काल दोष से पांच तीर्थंकर बालयति हुए।
16. निःशंकित , निः कांक्षित आदि सम्यग्दर्शन के आठ दोष हैं।
17. राजा नेमिनाथ का राज्यकाल 387 वर्ष है ।
18. सातवें नारायण पुरुषदत्त तीसरे स्वर्ग गए।
19. तीर्थंकर परमात्मा के शरीर का अति सुगंधित होना उनके जन्म का अतिशय है।
20. पृथ्वी गोल है और सदा घूमती रहती है ।
21. सभी 169 महापुरुष सम्यग्दृष्टि होते हैं ।
22. जीव अरूपी ही नहीं है ।
23. जीव ही अरूपी है ।
24. जीव अरूपी ही है।
25. पुद्गल परमाणु भी अरूपी है ।
Activity 21
सम्यक निर्णय के उत्तर

1. जिनके चार कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं ।
नहीं
2. सभी संमूर्छन जीव असंगी होते हैं ।
नहीं
3. नित्य निगोद वह स्थान है जहां से जीव कभी निकलता नही है ।
नहीं
4. इतर निगोद वह स्थान है जहाँ से जीव निकलता भी है और जाता भी है ।
हाँ
5. विश्व में जाति अपेक्षा छह और संख्या अपेक्षा अनंत द्रव्य नहीं हैं ।
नहीं
6. सभी फूल आकाश में ही खिलते हैं ।
हाँ
7. मुनिराजों के निमित्त से उनके लिए बनाया भोजन निर्दोष है।
नहीं
8 . भरत ऐरावत क्षेत्रों में लगातार 6 काल कर्मभूमि और 6 काल भोगभूमि रहती है।
हाँ
9. प्रमत्तदशा का मात्र छठा गुणस्थान होता है।
नहीं
10. पाकिस्तान से भी अनंत जीव मोक्ष गए हैं ।
हाँ
11. जिनके तीन कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं।
हाँ
12. छह ढाला ग्रंथ के रचयिता कविवर बुधजन जी हैं ।
हाँ
13. नंदीश्वर द्वीप में 52 पर्वत नहीं हैं ।
नहीं
14. नित्य निगोदिया जीव को अभी प्रथम गुणस्थान भी नहीं है।
नहीं
15. काल दोष से पांच तीर्थंकर बालयति हुए।
हाँ
16. निःशंकित , निः कांक्षित आदि सम्यग्दर्शन के आठ दोष हैं।
नहीं
17. राजा नेमिनाथ का राज्यकाल 387 वर्ष है ।
नहीं
18. सातवें नारायण पुरुषदत्त तीसरे स्वर्ग गए।
नहीं
19. तीर्थंकर परमात्मा के शरीर का अति सुगंधित होना उनके जन्म का अतिशय है।
हाँ
20. पृथ्वी गोल है और सदा घूमती रहती है ।
नहीं
21. सभी 169 महापुरुष सम्यग्दृष्टि होते हैं ।
हाँ
22. जीव अरूपी ही नहीं है ।
हाँ
23. जीव ही अरूपी है ।
नहीं
24. जीव अरूपी ही है।
नहीं
25. पुद्गल परमाणु भी अरूपी है ।
नहीं