Activity No. 26

दिमाग लगाओ 🙇‍♀ तीर्थस्थान के नाम बताओ
🔓1)🌙🌕
🔑1)

🔓2) ✋⛰
🔑2)

🔓3) 💎🌕
🔑3)

🔓5) 🐘❌पुर
🔑5)

🔓6) 👣⛰
🔑6)

🔓7) 🍞🌕
🔑7)

🔓8) 👂🔔⭕
🔑8)

🔓9) 8⃣👣
🔑9)

🔓10) 🍞⛰
🔑10)

🔓13) 🌺😬⛰
🔑13)

🔓14) 👀⛰
🔑14)

🔓15) 🍌sh⛰
🔑15)

🔓16)Taa🎨
🔑16)

🔓17) o 🌊 यां
🔑17)

🔓18) 🐚🙏
🔑18)

🔓19) 👑🏠
🔑19)

🔓20) 🐍🙏
🔑20)

🔓22) 💪सा❌
🔑22)

🔓24) 🎼⛰
🔑24)

🔓25) श्री👣⛰
🔑
Activity 26
उत्तर

1) चंद्रपुरी

2) हस्तगीरी

3) रत्नपुरी

5) हस्तिनापुर

6) कदम गिरी

7) पावापुरी

8) श्रवणबेलगोला

9) अष्टा पद

10) पावा गिरी

13) पुष्पदंतगिरी

14) नैनागिरी

15) कैलाशगिरी

16) तारंगा

17) ओसियां

18) शंखेश्वर

19) राजगृही

20) नागेश्वर

22)बलसाणा

24) सुरगिरी

25) श्रीपदगिरी

Activity No. 25

आज की एक्टिविटी का नाम है – परीक्षा सूत्रों से
आज की एक्टिविटी में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर अंताक्षरी की तरह प्रथम उत्तर के अंतिम अक्षर से शुरू करते हुए देना है ।सभी प्रश्न तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ से पूछे गए है अतः प्रश्न के उत्तर में मात्र सूत्र लिखना है । प्रथम प्रश्न का उत्तर म अक्षर से शुरू होगा । जैसे –
प्रश्न – सम्यक दर्शन का लक्षण क्या है ?
उत्तर – तत्वार्थश्रद्धानम् सम्यग्दर्शनम् ।।1-2।।
आपके लिए प्रश्न हैं –
1. मूल में बंध के कारण कितने एवं कौन कौन से हैं ?
2. शुक्ल ध्यान के प्रथम दो भेदों की विशेषता को बताने वाले वीचार का लक्षण क्या है ?
3. मनुष्य लोक में दिन रात आदि का व्यवहार जिनके द्वारा होता है ।
4. जीव के पांच भावों में से एक भाव के भेद प्रभेद बताने वाला सूत्र ।
5. चौदह नदियां कौन सी किस दिशा में बहती है ?
6. वैमानिक देवों में उत्तरोत्तर क्या क्या हीनता है ?
7. व्रतधारी जीव की क्या विशेषता है ?
8. वह शरीर जो लब्धि निमित्ताक होता है ?
9. कषाय अथवा प्रमादवश किसी जीव के प्राण हरना क्या कहलाता है ?
10. निश्चय सम्यग्दर्शनादि को जानने के उपाय कौन कौन से हैं ?
11. चरित्र मोह के उदय से होने वाले परिषह कौन कौन से हैं ?
12. वह कौन सा द्रव्य है जो चेतन भी नहीं है और अरुपी भी नहीं है ?
13. लब्धि एयर उपयोग को क्या कहते हैं ?
14. ज्योतिषी देव कहाँ रहते हैं और किसकी प्रदक्षिणा देते हैं ?
15. जिनकी विराधना से 70 कोड़ा कोड़ी सागर की स्थिति वाले दर्शनमोहनीय कर्म का आस्रव हो ?
16. मन वचन काय की कुटिलता से किस कर्म का आस्रव होता है ?
17. 9-4-10-5-2 किसके भेद हैं ?
18. पद्म सरोवर में कमल कितने विस्तार का है ?
19. ममत्व परिणाम को आचार्य ने क्या कहा है ?
20. वह ध्यान जो पहले से पांचवें गुणस्थान तक होता है ?
21. सामायिक जे प्रति अनादर और सामायिक पाठ भूल जाना किस व्रत का अतिचार है ?
22. अजीव के आधार से होने वाला आस्रव कितने प्रकार का है ?
23. किसी की गुप्त बात प्रकट करना किआ व्रत का अतिचार है ?
24. उपपाद जन्म किन किन को होता है ?
25. जिनका तीनों लोकों में निवास है वे कितने प्रकार के होते हैं ?

Activity 25
आज की एक्टिविटी का नाम है – परीक्षा सूत्रों से
उत्तर
जैसे –
प्रश्न – सम्यक दर्शन का लक्षण क्या है ?
उत्तर – तत्वार्थश्रद्धानम् सम्यग्दर्शनम् ।।1-2।।
आपके लिए प्रश्न हैं –
1. मूल में बंध के कारण कितने एवं कौन कौन से हैं ?
मिथ्यादर्शनाविरति – प्रमाद कषाय योगबंधहेतवः ।।
2. शुक्ल ध्यान के प्रथम दो भेदों की विशेषता को बताने वाले वीचार का लक्षण क्या है ?
विचारोsर्थ – व्यंजनयोग – संक्रान्तिः ।।
3. मनुष्य लोक में दिन रात आदि का व्यवहार जिनके द्वारा होता है ।
तत्क्रतः काल विभागः ।।
4. जीव के पांच भावों में से एक भाव के भेद प्रभेद बताने वाला सूत्र ।
गति कषाय लिंग मिथ्यादर्शनाज्ञानासंयता सिद्ध लेश्याश्चतुश्चतु ।।
5. चौदह नदियां कौन सी किस दिशा में बहती है ?
द्वयोर्द्वयोः पूर्वाः पूर्वगाः ।।
6. वैमानिक देवों में उत्तरोत्तर क्या क्या हीनता है ?
गति शरीर परिग्रहाभिमानतो हीनाः ।।
7. व्रतधारी जीव की क्या विशेषता है ?
निः शल्यो व्रती ।।
8. वह शरीर जो लब्धि निमित्तक होता है ?
तैजसमपि ।।
9. कषाय अथवा प्रमादवश किसी जीव के प्राण हरना क्या कहलाता है ?
प्रमत्तयोगात् प्राणव्यपरोपणं हिंसा ।।
10. निश्चय सम्यग्दर्शनादि को जानने के उपाय कौन कौन से हैं ?
सत्संख्याक्षेत्र स्पर्शनकालान्तर भावाल्पबहुत्वैश्च ।।
11. चरित्र मोह के उदय से होने वाले परिषह कौन कौन से हैं ?
चारित्रमोहेनाम्न्यारती स्त्री निषद्याक्रोश याचना सत्कार पुरुष्कारः ।।
12. वह कौन सा द्रव्य है जो चेतन भी नहीं है और अरुपी भी नहीं है ?
रूपिणः पुद्गलाः ।।
13. लब्धि एयर उपयोग को क्या कहते हैं ?
लब्ध्युपयोगौ भावेन्द्रियम् ।।
14. ज्योतिषी देव कहाँ रहते हैं और किसकी प्रदक्षिणा देते हैं ?
मेरु प्रदिक्षणानित्यगतयो नृलोके ।।
15. जिनकी विराधना से 70 कोड़ा कोड़ी सागर की स्थिति वाले दर्शनमोहनीय कर्म का आस्रव हो ?
केवलिश्रुतसंघधर्मदेवावर्णवादो दर्शनमोहस्य ।।
16. मन वचन काय की कुटिलता से किस कर्म का आस्रव होता है ?
योगवक्रता विसंवादनंचाशुभस्य नाम्नः ।।
17 9-4-10-5-2 किसके भेद हैं ?
नावचतुर्दश पंचद्विभेदा यथाक्रमम् प्रागध्यानात् ।।
18. पद्म सरोवर में कमल कितने विस्तार का है ?
तन्मधयेयोजनम् पुष्करं ।।
19. ममत्व परिणाम को आचार्य ने क्या कहा है ?
मुर्छा परिग्रहः ।।
20. वह ध्यान जो पहले से पांचवें गुणस्थान तक होता है ?
हिंसानृतस्तेय विषयसंरक्षणेभ्यो रौद्रमविरतदेश विरतयो ।।
21. सामायिक जे प्रति अनादर और सामायिक पाठ भूल जाना किस व्रत का अतिचार है ?
योगदःप्राणिधानानादर स्मृत्यनुपस्थानानि ।।
22. अजीव के आधार से होने वाला आस्रव कितने प्रकार का है ?
निवर्तनानिक्षेपसंयोगनिसर्गाद्वि चतुर्द्वित्रिभेदाः परम ।।
23. किसी की गुप्त बात प्रकट करना किआ व्रत का अतिचार है ?
मिथ्योपदेश रहोभ्याख्यान कूटलेखक्रियान्यासापहार साकारमंत्र भेदा ।।
24. उपपाद जन्म किन किन को होता है ?
देवनारकाणामुपपादः ।।
25. जिनका तीनों लोकों में निवास है वे कितने प्रकार के होते हैं ?
देवश्चतुर्निकायाः ।।

Activity No. 24

आज की एक्टिविटी का नाम है – सुमिरें आचार्यों को
आज की एक्टिविटी में आप सभी को सभी प्रश्नों के उत्तर आ से ही देने हैं ।
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं –
1. सप्त भयों में से एक ।
2.अभिलाषा का एक पर्यायवाची नाम ।
3. अवगाहन हेतुत्व है लक्षण जिसका ।
4. शिकार खेलना कहलाता है ।
5. आचार्यों की परम्परा से प्राप्त मूल सिद्धांत कहलाता है ।
6. दक्षिण पूर्व विदिशा का नाम ।
7. सम्यक दर्शन के अनेक भेदों में से एक।
8. धर्म ध्यान का एक भेद ।
9. जीव का एक पर्यायवाची नाम ।
10. आचार्य जिन सेन स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ ।
11. स्वाध्याय का एक भेद।
12. मायाचार परिणाम के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का एक धर्म ।
13. काल का एक प्रमाण (नाप) विशेष।
14. शास्त्रो मे काथ के खोड़े के समान जिस कर्म को बताया है।
15.आचार्य समंथ भद्र स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ।
16. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वरूप क बिना अन्य पदार्थ एवं प्रभाव किंचित मात्र भी आत्मा क नही है- ऐसा बताने वाला प्रत्येक आत्मा का एक धर्म।
17. निकट भव्य कहलाता है।
18.जिस माह मे स्वर्ग के असंख्यात देव नंदीश्वर द्वीप मे पूजन करने जाते है।
19. जब तक कर्म उदय मे ना आवे तब तक काल कहलाता है।
20. चार संघ का एक भेद।
Activity 24
आज की एक्टिविटी का नाम है – सुमिरें आचार्यों को
उत्तर
1. सप्त भयों में से एक ।
आकस्मिक
2.अभिलाषा का एक पर्यायवाची नाम ।
आकांक्षा
3. अवगाहन हेतुत्व है लक्षण जिसका ।
आकाश
4. शिकार खेलना कहलाता है ।
आखेट
5. आचार्यों की परम्परा से प्राप्त मूल सिद्धांत कहलाता है ।
आगम
6. दक्षिण पूर्व विदिशा का नाम ।
आग्नेय
7. सम्यक दर्शन के अनेक भेदों में से एक।
आज्ञा
8. धर्म ध्यान का एक भेद ।
आज्ञा विचय
9. जीव का एक पर्यायवाची नाम ।
आत्मा
10. आचार्य जिन सेन स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ ।
आदिपुराण
11. स्वाध्याय का एक भेद।
आम्नाय
12. मायाचार परिणाम के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का एक धर्म ।
आर्जव धर्म
13. काल का एक प्रमाण (नाप) विशेष।
आवली
14. शास्त्रो मे काथ के खोड़े के समान जिस कर्म को बताया है।
आयुकर्म
15.आचार्य समंथ भद्र स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ।
आप्तमीमांसा
16. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वरूप क बिना अन्य पदार्थ एवं प्रभाव किंचित मात्र भी आत्मा क नही है- ऐसा बताने वाला प्रत्येक आत्मा का एक धर्म।
आकिंचन्य धर्म
17. निकट भव्य कहलाता है।
आसन्न भव्य
18.जिस माह मे स्वर्ग के असंख्यात देव नंदीश्वर द्वीप मे पूजन करने जाते है।
आषाढ
19. जब तक कर्म उदय मे ना आवे तब तक काल कहलाता है।
आबाधा काल
20. चार संघ का एक भेद।
आर्यिका

Activity No. 23

आज की एक्टिविटी का नाम है – करें प्रथमानुयोग की सैर
इस एक्टिविटी में आपको कुछ वाक्य दिये जायेंगे और आपको बताना है कि वह किसने किससे और कब कहा ।
तो
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं –
1. क्या इस पृथ्वी पर मेरे जैसे और भी असंख्य चक्रवर्ती राजा हो गए हैं ? इस पर्वत का खंड खंड उनकी प्रशस्तियों से भरा हुआ है । इसमें तो एक नाम लिखने की भी जगह नहीं है ।
2. भाई ! तू इस मंत्र को रात ले और जीवन में उतार ले , तेरा कल्याण हो जाएगा । मंत्र है – मा तुष मा रुष (राग मत कर द्वेष मत कर)
3. मेरे मरने के पश्चात संसार को शिक्षा देने के लिये मेरे खाली हाथ अर्थी से बाहर रखे जाएं और मेरे जनाजे के साथ अनेक देशों से लूटी हुई विशाल संपत्ति श्मशान भूमि तक ले जाई जाए , जिससे जनता यह अनुभव कर सकें कि आत्मा के साथ कोई सांसारिक पदार्थ नहीं जाता ।
4. इस समय सवाल मेरे या आपके जीवन का नहीं , अपितु जैन शासन की रक्षा का है । अब विलंब करोगे तो हम दोनों पकड़े जायेंगें , इसलिए जल्दी जाओ । जैन शासन की प्रभावना जितनी आप कर सकेंगें , उतनी मैं नहीं कर सकता , इसलिए जैन शासन की सेवा के लिये आप अपना जीवन बचाओ ।
5. मेरे पवित्र कुल को उज्ज्वल करने वाली कन्या , मैं मानता हूं कि मजाक में दिया गया व्रत भी सत्य है परंतु वह तो मात्र आठ दिनों के लिये ही था जबकि तू तो विवाह से ही इनकार कर रही हो।
6. फेरे नहीं हुए उससे क्या ? मैं उनको हृदय से वरण कर चुकी हूँ , वे ही मेरे स्वामी और जीवन साथी है मेरे हृदय में किसी और के लिये स्थान नहीं है ।अब सांसारिक भोगों के बदले मोक्ष की साधना में मैं उनकी संगिनी बनूँगी और अपने नाथ के धर्म पथ पर चल कर अपना आत्म कल्याण करूँगी ।
7. लोक निंदा के भय से आपने मुझे तो त्याग दिया परंतु लोक निंदा के भय से आप कभी जैनधर्म को मत त्यागना ।

Activity 23
करें प्रथमानुयोग की सैर
उत्तर
1. क्या इस पृथ्वी पर मेरे जैसे और भी असंख्य चक्रवर्ती राजा हो गए हैं ? इस पर्वत का खंड खंड उनकी प्रशस्तियों से भरा हुआ है । इसमें तो एक नाम लिखने की भी जगह नहीं है ।

भरत चक्रवती ने अपने सेनापति से कहा जब वे वृषभाचल पर्वत पर अपना नाम लिखने गए थे ।

2. भाई ! तू इस मंत्र को रात ले और जीवन में उतार ले , तेरा कल्याण हो जाएगा । मंत्र है – मा तुष मा रुष (राग मत कर द्वेष मत कर)

शिवभूति मुनिराज के गुरु ने शिवभूति मुनिराज से कहा जब उन्हें एक शब्द भी स्मरण नही रहता था।

3. मेरे मरने के पश्चात संसार को शिक्षा देने के लिये मेरे खाली हाथ अर्थी से बाहर रखे जाएं और मेरे जनाजे के साथ अनेक देशों से लूटी हुई विशाल संपत्ति श्मशान भूमि तक ले जाई जाए , जिससे जनता यह अनुभव कर सकें कि आत्मा के साथ कोई सांसारिक पदार्थ नहीं जाता ।

सिकन्दर ने अपने साथियों से अपनी मृत्यु से पहले अंतिम समय मे कहा ।

4. इस समय सवाल मेरे या आपके जीवन का नहीं , अपितु जैन शासन की रक्षा का है । अब विलंब करोगे तो हम दोनों पकड़े जायेंगें , इसलिए जल्दी जाओ । जैन शासन की प्रभावना जितनी आप कर सकेंगें , उतनी मैं नहीं कर सकता , इसलिए जैन शासन की सेवा के लिये आप अपना जीवन बचाओ ।

निकलंक ने अकलंक से कहा जब सैनिक उनके पीछे पड़े थे ।

5. मेरे पवित्र कुल को उज्ज्वल करने वाली कन्या , मैं मानता हूं कि मजाक में दिया गया व्रत भी सत्य है परंतु वह तो मात्र आठ दिनों के लिये ही था जबकि तू तो विवाह से ही इनकार कर रही हो।

प्रियदत्त सेठ ने अपनी पुत्री अनन्तमती से कहा जब उन्होंने विवाह के लिये मना कर दिया था ।

6. फेरे नहीं हुए उससे क्या ? मैं उनको हृदय से वरण कर चुकी हूँ , वे ही मेरे स्वामी और जीवन साथी है मेरे हृदय में किसी और के लिये स्थान नहीं है ।अब सांसारिक भोगों के बदले मोक्ष की साधना में मैं उनकी संगिनी बनूँगी और अपने नाथ के धर्म पथ पर चल कर अपना आत्म कल्याण करूँगी ।

राजुल ने अपने पिता से कहा जब नेमिकुमार ने दीक्षा ले ली ।

7. लोक निंदा के भय से आपने मुझे तो त्याग दिया परंतु लोक निंदा के भय से आप कभी जैनधर्म को मत त्यागना ।

सीता जी ने कृतांतवक्र सेनापति से कहा जब उन्हें जंगल मे छोड़ा गया ।

Activity No. 22

इस एक्टिविटी में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर तत्वार्थ सूत्र के प्रथम एवं द्वितीय अध्याय से देने हैं ।
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं …..
1. सिद्ध भगवान जे पांच में से कितने भाव हैं ?
2. शीघ्रता से पदार्थों का ज्ञान होना कहलाता है ?
3. घर के नौकर को उसके करोड़ीमल नाम से बुलाना कौन सा निक्षेप है ?
4. जीव के यथार्थ स्वभाव को बताने वाला सूत्र लिखें ?
5. चींटी कितने इन्द्रिय जीव है ?
6. वह ज्ञान जो नारकियों को तो होता है किंतु मनुष्यों और तिर्यन्चों को नहीं होता ?
7. एक से चार इन्द्रिय तक के जीवों के कितने शरीर होते हैं ?
8. असिद्धत्व किस भाव का भेद है ?
9. अ नामक जीव के पास पांच में से एक ज्ञान है और ब के पास दो । बताइये कौन महिमावन्त है ?
10. कभी न भूलने की शक्ति क्या कहलाती है ?
11. भूत पिशाच राक्षस आदि का कौन सा जन्म होता है ?
12. जानना देखना स्वभाव का एक नाम ?
13. विद्वान को प्रवचन करते समय ही विद्वान कहना किस नय का कथन है ?
14. यह जीव पांच भावों में से किस भाव को भूलकर अनादि से दुखी है ?
15. जो चक्षु और मन के अतिरिक्त शेष चार इन्द्रियों के द्वारा होता है ?
16. भगवान की पूजन करने का भाव पांच भावों में से एक ?
17. स्थावर कितने इन्द्रिय जीव है ?
18. ऐसे कितने शरीर हैं जो समस्त संसारी जीवों के पाए जाते हैं ?
19. एक साथ दो ज्ञान होंगें तो कौन कौन से ?
20. जीव रागी द्वेषी होने पर भी अनादि से शुद्ध चैतन्यमय है – ऐसा गौरव दिलाने वाला भाव ?
21. मक्खी मच्छर आदि का होने वाला जन्म ?
22. तालाब में पानी के बाहर निकली सूंड को देखकर डूबे हुए हाथी का ज्ञान कहलाता है ?
23. जीव , अधिकतम कितने समय में नया शरीर धारण कर लेता है ?
24. एक जीव के एक साथ कितने शरीर हो सकते हैं ?
25. आदिनाथ के समवसरण में भरत जी को देखकर कहना – ये तो वही हैं जिन्हें युद्ध के क्षेत्र में देखा था – यह कौन सा मति ज्ञान है ?
Activity 22
उत्तर
1. सिद्ध भगवान जे पांच में से कितने भाव हैं ?
दो
2. शीघ्रता से पदार्थों का ज्ञान होना कहलाता है ?
क्षिप्र
3. घर के नौकर को उसके करोड़ीमल नाम से बुलाना कौन सा निक्षेप है ?
नाम
4. जीव के यथार्थ स्वभाव को बताने वाला सूत्र लिखें ?
उपयोगोलक्षणं
5. चींटी कितने इन्द्रिय जीव है ?
तीन
6. वह ज्ञान जो नारकियों को तो होता है किंतु मनुष्यों और तिर्यन्चों को नहीं होता ?
भवप्रत्यय अवधिज्ञान
7. एक से चार इन्द्रिय तक के जीवों के कितने शरीर होते हैं ?
तीन
8. असिद्धत्व किस भाव का भेद है ?
औदायिक
9. अ नामक जीव के पास पांच में से एक ज्ञान है और ब के पास दो । बताइये कौन महिमावन्त है ?

10. कभी न भूलने की शक्ति क्या कहलाती है ?
धारणा
11. भूत पिशाच राक्षस आदि का कौन सा जन्म होता है ?
उपपाद
12. जानना देखना स्वभाव का एक नाम ?
उपयोग
13. विद्वान को प्रवचन करते समय ही विद्वान कहना किस नय का कथन है ?
ऐवंभूत
14. यह जीव पांच भावों में से किस भाव को भूलकर अनादि से दुखी है ?
पारिणामिक
15. जो चक्षु और मन के अतिरिक्त शेष चार इन्द्रियों के द्वारा होता है ?
व्यंजनावग्रह
16. भगवान की पूजन करने का भाव पांच भावों में से एक ?
औदायिक
17. स्थावर कितने इन्द्रिय जीव है ?
एक
18. ऐसे कितने शरीर हैं जो समस्त संसारी जीवों के पाए जाते हैं ?
दो
19. एक साथ दो ज्ञान होंगें तो कौन कौन से ?
मति श्रुत
20. जीव रागी द्वेषी होने पर भी अनादि से शुद्ध चैतन्यमय है – ऐसा गौरव दिलाने वाला भाव ?
पारिणामिक
21. मक्खी मच्छर आदि का होने वाला जन्म ?
सम्मूर्छन
22. तालाब में पानी के बाहर निकली सूंड को देखकर डूबे हुए हाथी का ज्ञान कहलाता है ?
अनिसृत
23. जीव , अधिकतम कितने समय में नया शरीर धारण कर लेता है ?
चार
24. एक जीव के एक साथ कितने शरीर हो सकते हैं ?
चार
25. आदिनाथ के समवसरण में भरत जी को देखकर कहना – ये तो वही हैं जिन्हें युद्ध के क्षेत्र में देखा था – यह कौन सा मति ज्ञान है ?
प्रत्यभिज्ञान/संज्ञा

Activity No. 21

आज की एक्टिविटी का नाम है – सम्यक निर्णय
इस एक्टिविटी में आपको ज्यादा कुछ नही करना बस प्रत्येक प्रश्न का उत्तर हाँ या ना में देना है …..
तो आइए शुरू करते हैं ।
1. जिनके चार कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं ।
2. सभी संमूर्छन जीव असंगी होते हैं ।
3. नित्य निगोद वह स्थान है जहां से जीव कभी निकलता नही है ।
4. इतर निगोद वह स्थान है जहाँ से जीव निकलता भी है और जाता भी है ।
5. विश्व में जाति अपेक्षा छह और संख्या अपेक्षा अनंत द्रव्य नहीं हैं ।
6. सभी फूल आकाश में ही खिलते हैं ।
7. मुनिराजों के निमित्त से उनके लिए बनाया भोजन निर्दोष है।
8 . भरत ऐरावत क्षेत्रों में लगातार 6 काल कर्मभूमि और 6 काल भोगभूमि रहती है।
9. प्रमत्तदशा का मात्र छठा गुणस्थान होता है।
10. पाकिस्तान से भी अनंत जीव मोक्ष गए हैं ।
11. जिनके तीन कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं।
12. छह ढाला ग्रंथ के रचयिता कविवर बुधजन जी हैं ।
13. नंदीश्वर द्वीप में 52 पर्वत नहीं हैं ।
14. नित्य निगोदिया जीव को अभी प्रथम गुणस्थान भी नहीं है।
15. काल दोष से पांच तीर्थंकर बालयति हुए।
16. निःशंकित , निः कांक्षित आदि सम्यग्दर्शन के आठ दोष हैं।
17. राजा नेमिनाथ का राज्यकाल 387 वर्ष है ।
18. सातवें नारायण पुरुषदत्त तीसरे स्वर्ग गए।
19. तीर्थंकर परमात्मा के शरीर का अति सुगंधित होना उनके जन्म का अतिशय है।
20. पृथ्वी गोल है और सदा घूमती रहती है ।
21. सभी 169 महापुरुष सम्यग्दृष्टि होते हैं ।
22. जीव अरूपी ही नहीं है ।
23. जीव ही अरूपी है ।
24. जीव अरूपी ही है।
25. पुद्गल परमाणु भी अरूपी है ।
Activity 21
सम्यक निर्णय के उत्तर

1. जिनके चार कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं ।
नहीं
2. सभी संमूर्छन जीव असंगी होते हैं ।
नहीं
3. नित्य निगोद वह स्थान है जहां से जीव कभी निकलता नही है ।
नहीं
4. इतर निगोद वह स्थान है जहाँ से जीव निकलता भी है और जाता भी है ।
हाँ
5. विश्व में जाति अपेक्षा छह और संख्या अपेक्षा अनंत द्रव्य नहीं हैं ।
नहीं
6. सभी फूल आकाश में ही खिलते हैं ।
हाँ
7. मुनिराजों के निमित्त से उनके लिए बनाया भोजन निर्दोष है।
नहीं
8 . भरत ऐरावत क्षेत्रों में लगातार 6 काल कर्मभूमि और 6 काल भोगभूमि रहती है।
हाँ
9. प्रमत्तदशा का मात्र छठा गुणस्थान होता है।
नहीं
10. पाकिस्तान से भी अनंत जीव मोक्ष गए हैं ।
हाँ
11. जिनके तीन कल्याणक होते हैं वे भी तीर्थंकर कहलाते हैं।
हाँ
12. छह ढाला ग्रंथ के रचयिता कविवर बुधजन जी हैं ।
हाँ
13. नंदीश्वर द्वीप में 52 पर्वत नहीं हैं ।
नहीं
14. नित्य निगोदिया जीव को अभी प्रथम गुणस्थान भी नहीं है।
नहीं
15. काल दोष से पांच तीर्थंकर बालयति हुए।
हाँ
16. निःशंकित , निः कांक्षित आदि सम्यग्दर्शन के आठ दोष हैं।
नहीं
17. राजा नेमिनाथ का राज्यकाल 387 वर्ष है ।
नहीं
18. सातवें नारायण पुरुषदत्त तीसरे स्वर्ग गए।
नहीं
19. तीर्थंकर परमात्मा के शरीर का अति सुगंधित होना उनके जन्म का अतिशय है।
हाँ
20. पृथ्वी गोल है और सदा घूमती रहती है ।
नहीं
21. सभी 169 महापुरुष सम्यग्दृष्टि होते हैं ।
हाँ
22. जीव अरूपी ही नहीं है ।
हाँ
23. जीव ही अरूपी है ।
नहीं
24. जीव अरूपी ही है।
नहीं
25. पुद्गल परमाणु भी अरूपी है ।
नहीं

Activity No. 20

इस एक्टिविटी का नाम है – जपो नाम अरहंत का
आज की एक्टिविटी में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर अ अक्षर से ही देना है ।
1. नंदीश्वर द्वीप म पाया जाना वाला एक पर्वत ।
2. साधन से होने वाला साध्य का ज्ञान – ऐसे परोक्ष प्रमाण का एक भेद ।
3. सात सौ मुनिराजों के संघ के नायक एक आचार्य ।
4. जिस ज्योतिषि देव ने देशभूषण एवं कुलभूषण मुनिराज पर उपसर्ग किया तथा जो वनवासी राम और लक्ष्मण के निमित्त से दूर हुआ ।
5. जिनके आने की कोई तिथि नहीं होती ऐसे मुनि आर्यिका आदि कहलाते हैं ।
6. मुनिराजों को कहते हैं ।
7. कृष्ण का पोता और प्रद्युम्न का पुत्र ।
8. पं. दीपचंद जी शाह द्वारा रचित एक आध्यात्मिक ग्रंथ ।
9. राजा श्रेणिक का पुत्र ।
10. शक्ति का छोटे से चोट अंश कहलाता है ।
11. गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र ।
12. उस विशालकाय जानवर का नाम जिसकी पीठ पर भी चार पैर होते हैं ।
13. अरहंत परमात्मा जिन अठारह दोषों से रहित होते हैं , उनमे से एक ।
14. दूसरे नं के रुद्र जितशत्रु किस तीर्थंकर के काल में हुए ।
15. बहुप्रदेशी द्रव्य को कहते हैं ।
16. आयु कर्म के अभाव में प्रगट होने वलवात्मा का गुण ।
17. लक्षण का लक्ष्य और अलक्षय दोनो में पाया जाना कहलाता है ।
18 . अर्थदण्ड का एक भेद ।
19. औदायिक भाव का वह भेद जिसके उदय में जीव सिद्धत्व को प्राप्त ना कर सके ।
20. कविवर पं. श्री दौलतराम जी ने छःढाला ग्रंथ की दूसरी ढाल के दूसरे छंद की प्रथम पंक्ति में जिसका स्वरूप बताया है ।

Activity 20
जपो नाम अरहंत का
उत्तर
1. नंदीश्वर द्वीप में पाया जाना वाला एक पर्वत ।
अंजनगिरी
2. साधन से होने वाला साध्य का ज्ञान – ऐसे परोक्ष प्रमाण का एक भेद ।
अनुमान/अभिनिबोध
3. सात सौ मुनिराजों के संघ के नायक एक आचार्य ।
अकंपनाचार्य
4. जिस ज्योतिषि देव ने देशभूषण एवं कुलभूषण मुनिराज पर उपसर्ग किया तथा जो वनवासी राम और लक्ष्मण के निमित्त से दूर हुआ ।
अग्निप्रभ देव
5. जिनके आने की कोई तिथि नहीं होती ऐसे मुनि आर्यिका आदि कहलाते हैं ।
अतिथि
6. मुनिराजों को कहते हैं ।
अनगार
7. कृष्ण का पोता और प्रद्युम्न का पुत्र ।
अनिरुद्ध
8. पं. दीपचंद जी शाह द्वारा रचित एक आध्यात्मिक ग्रंथ ।
अनुभव प्रकाश/अध्यात्म पांच संग्रह
9. राजा श्रेणिक का पुत्र ।
अभयकुमार
10. शक्ति का छोटे से चोट अंश कहलाता है ।
अविभाग प्रतिच्छेद
11. गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र ।
अश्वत्थामा
12. उस विशालकाय जानवर का नाम जिसकी पीठ पर भी चार पैर होते हैं ।
अष्टापद
13. अरहंत परमात्मा जिन अठारह दोषों से रहित होते हैं , उनमे से एक ।
अरति
14. दूसरे नं के रुद्र जितशत्रु किस तीर्थंकर के काल में हुए ।
अजितनाथ
15. बहुप्रदेशी द्रव्य को कहते हैं ।
अस्तिकाय
16. आयु कर्म के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का गुण ।
अवगाहनत्व
17. लक्षण का लक्ष्य और अलक्षय दोनो में पाया जाना कहलाता है ।
अतिव्याप्ति
18 . अनर्थदण्ड का एक भेद ।
अपध्यान
19. औदायिक भाव का वह भेद जिसके उदय में जीव सिद्धत्व को प्राप्त ना कर सके ।
असिद्धत्व
20. कविवर पं. श्री दौलतराम जी ने छःढाला ग्रंथ की दूसरी ढाल के दूसरे छंद की प्रथम पंक्ति में जिसका स्वरूप बताया है ।
अग्रहीत मिथ्यादर्शन

Activity No. 19

आज की एक्टिविटी का नाम है , मोबाइल नंबर
इस एक्टिविटी में मैं यहां कुछ अंक लिखूंगी वो किसी के भेद प्रभेद होंगे आपको बताना है किसके हैं और कैसे ।
जैसे – मैनें लिखा 55567 तो इनका कुल योग हुआ 28 तो आपको बताना है कि ये मुनिराज के 28 मूलगुण हैं ,
5 महाव्रत , 5 समिति , 5 इंद्रियविजय , षट आवश्यक , शेष 7 गुण । इसप्रकार ये 28 मूलगुण हुए।
आपके लिए प्रश्न है —
1. 55567
2. 2412999
3. 5928524932
4. 2420170
5. 8525
6. 8863
7. 403224211
8. 2918213
9. 5151225
10. 53558
11. 44449
12. 1219222324
13. 55160
Activity 19 के उत्तर

1. 28 मूलगुण
मुनिराज के 28 मूलगुण हैं ,
5 महाव्रत , 5 समिति , 5 इंद्रियविजय , षट आवश्यक , शेष 7 गुण । इसप्रकार ये 28 मूलगुण हुए।

2. 63 शलाका पुरुष
24 तीर्थंकर , 12 चक्रवर्ती , 9 बलभद्र , 9 नारायण , प्रतिनारायण

3.148 कर्म प्रकृतियाँ
5 ज्ञानावरण , 9 दर्शनावरण , 28 मोहनीय , 5 अंतराय , 2 वेदनीय , 4 आयु , 93 नाम , 2 गोत्र

4. तीर्थंकर
24 वर्तमान चौबीसी , 20 विदेह क्षेत्र के , 170 कर्मभूमि के

5. पुद्गल की पर्याय
8 स्पर्श की , 5 रस की , 2 गंध की , 5 वर्ण की

6. 25 दोष
8 शंकादि दोष , 8 मद , 6 अनायतन , 3 मूढ़ता

7. 100 इंद्र
40 भवनवासी , 32 व्यंतर , 24 कल्पवासी , 2 ज्योतिष , 1 मनुष्य , 1 तिर्यंच

8. भावों के 53 भेद
2 औपशमीक , 9 क्षायिक , 18 क्षयोपशमिक , 21 औदायिक , 3 पारिणामिक

9. आश्रव के भेद
5 मिथ्यात्व , 15 प्रमाद , 12 अविरति , 25 कषाय

10. णमोकार मंत्र
5 पद , 35 अक्षर , 58 मात्राएँ

11. 25 कषाय
4 अनंतानुबंधी , 4 अप्रत्याख्यानवारण , 4 प्रत्याख्यानवारण , 4 संज्वलन , 9 नोकषाय

12. 5 बालयति
12 वे वासुपूज्य स्वामी , 19 वे मुनिसुव्रतनाथ स्वामी, 22 वे नेमिनाथ स्वामी , 23 वे पार्श्वनाथ स्वामी , 24 वे महावीर स्वामी

13. कर्मभूमि के तीर्थंकर
5 पांच भरत क्षेत्र के , 5 पांच ऐरावत क्षेत्र , 160 पांच विदेह क्षेत्र के

Activity No. 18

Activity No. 18
आज की एक्टिविटी का नाम है – वैराग्य का कारण जातिस्मरण
आज की एक्टिविटी में आपको उन तीर्थंकरों के नाम बताने हैं जिनके वैराग्य का कारण जातिस्मरण ज्ञान बना …..पर पर ध्यान रहे कि आपको यह भी बताना है कि वे कौनसे नंबर के तीर्थंकर हैं और उनका चिन्ह कौनसा है ।
उदाहरण
पांचवे सुमतिनाथ जी चकवा का चिन्ह
उत्तर
5वे सुमतिनाथ चकवा का चिन्ह
6वे पद्मप्रभ नीलकमल का चिन्ह
12वे वासुपूज्य भैंसा का चिन्ह
16वे शांतिनाथ हिरण का चिन्ह
17वे कुंथुनाथ बकरा का चिन्ह
20वे मुनिसुव्रतनाथ कछुआ का चिन्ह
21वे नमिनाथ कमल का चिन्ह
23वे पार्श्वनाथ सर्प का चिन्ह
24वे महावीर स्वामी सिंह का चिन्ह

Activity No. 17

Activity No. 17
प्रथमानुयोग
करणानुयोग
चरणानुयोग
द्रव्यानुयोग
प्रत्येक अनुयोग के शास्त्रों के नाम उनके रचयिता के नाम के साथ बताना है ।
जीतेगा वही जो सबसे ज्यादा बताएगा ।
इस एक्टिविटी में एक ट्विस्ट है , अगर 1 अनुयोग का 1 ग्रंथ बताया और दूसरे अनुयोग के 4 तो गिना केवल एक ही जायेगा ।सभी के 2222 या 4444 ऐसे ही होना चाहिए ।
उत्तर
द्रव्यानुयोग

समयसार जी
प्रवचनसार जी
नियमसार जी
पंचास्तिकाय जी
👆
इन पांचों ग्रंथों के रचयिता कुंद कुंद आचार्य हैं
मोक्षमार्ग प्रकाशक जी – पं. टोडरमल जी
प्रथमानुयोग

हरिवंश पुराण – जिनसेनाचार्य
पद्म पुराण – रविषेण आचार्य
आदिपुराण – जिनसेनाचार्य
उत्तरपुराण – गुणभद्राचार्य
श्रीपाल चरित्र

करणानुयोग

त्रिलोकसार – आचार्य नेमीचंद
गोमटसार – आचार्य नेमीचंद
लब्धिसार – आचार्य नेमीचंद
षट्खंडागम – आचार्य भूतबलि और आचार्य पुष्पदंत
तिलोयपन्नत्ति – वृषभाचार्य यति

चरणानुयोग

भगवती आराधना – शिवकोटी मुनिराज
रत्नकरंड श्रावकाचार – समंतभद्राचार्य
मूलाचार – आचार्य वट्टकेश्वर
अष्टपाहुड – कुन्दकुन्द आचार्य
पुरुषार्थसिद्धि उपाय
श्रावक धर्म प्रकाश
आत्मानुशासन