Activity No. 24

आज की एक्टिविटी का नाम है – सुमिरें आचार्यों को
आज की एक्टिविटी में आप सभी को सभी प्रश्नों के उत्तर आ से ही देने हैं ।
आपके लिए प्रश्न इसप्रकार हैं –
1. सप्त भयों में से एक ।
2.अभिलाषा का एक पर्यायवाची नाम ।
3. अवगाहन हेतुत्व है लक्षण जिसका ।
4. शिकार खेलना कहलाता है ।
5. आचार्यों की परम्परा से प्राप्त मूल सिद्धांत कहलाता है ।
6. दक्षिण पूर्व विदिशा का नाम ।
7. सम्यक दर्शन के अनेक भेदों में से एक।
8. धर्म ध्यान का एक भेद ।
9. जीव का एक पर्यायवाची नाम ।
10. आचार्य जिन सेन स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ ।
11. स्वाध्याय का एक भेद।
12. मायाचार परिणाम के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का एक धर्म ।
13. काल का एक प्रमाण (नाप) विशेष।
14. शास्त्रो मे काथ के खोड़े के समान जिस कर्म को बताया है।
15.आचार्य समंथ भद्र स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ।
16. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वरूप क बिना अन्य पदार्थ एवं प्रभाव किंचित मात्र भी आत्मा क नही है- ऐसा बताने वाला प्रत्येक आत्मा का एक धर्म।
17. निकट भव्य कहलाता है।
18.जिस माह मे स्वर्ग के असंख्यात देव नंदीश्वर द्वीप मे पूजन करने जाते है।
19. जब तक कर्म उदय मे ना आवे तब तक काल कहलाता है।
20. चार संघ का एक भेद।
Activity 24
आज की एक्टिविटी का नाम है – सुमिरें आचार्यों को
उत्तर
1. सप्त भयों में से एक ।
आकस्मिक
2.अभिलाषा का एक पर्यायवाची नाम ।
आकांक्षा
3. अवगाहन हेतुत्व है लक्षण जिसका ।
आकाश
4. शिकार खेलना कहलाता है ।
आखेट
5. आचार्यों की परम्परा से प्राप्त मूल सिद्धांत कहलाता है ।
आगम
6. दक्षिण पूर्व विदिशा का नाम ।
आग्नेय
7. सम्यक दर्शन के अनेक भेदों में से एक।
आज्ञा
8. धर्म ध्यान का एक भेद ।
आज्ञा विचय
9. जीव का एक पर्यायवाची नाम ।
आत्मा
10. आचार्य जिन सेन स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ ।
आदिपुराण
11. स्वाध्याय का एक भेद।
आम्नाय
12. मायाचार परिणाम के अभाव में प्रगट होने वाला आत्मा का एक धर्म ।
आर्जव धर्म
13. काल का एक प्रमाण (नाप) विशेष।
आवली
14. शास्त्रो मे काथ के खोड़े के समान जिस कर्म को बताया है।
आयुकर्म
15.आचार्य समंथ भद्र स्वामी द्वारा रचित एक ग्रंथ।
आप्तमीमांसा
16. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वरूप क बिना अन्य पदार्थ एवं प्रभाव किंचित मात्र भी आत्मा क नही है- ऐसा बताने वाला प्रत्येक आत्मा का एक धर्म।
आकिंचन्य धर्म
17. निकट भव्य कहलाता है।
आसन्न भव्य
18.जिस माह मे स्वर्ग के असंख्यात देव नंदीश्वर द्वीप मे पूजन करने जाते है।
आषाढ
19. जब तक कर्म उदय मे ना आवे तब तक काल कहलाता है।
आबाधा काल
20. चार संघ का एक भेद।
आर्यिका

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